शनिवार, जनवरी 16, 2010

मॉडर्न समाज

आजकल इज्जतदारों के भाव गिर गये हैं
औने-पौने दाम पर इमान बिक रहे है।

लगने लगी है रिश्तों की बोलियां
इंसान सरेआम नीलाम हो रहे है।

लंबी-लंबी कार पर चढ़ने की हसरत में
शहर में तेजी से बेइमान बढ़ रहे हैं।

इस मॉडर्न बाजार में जो शिरकत नहीं करते
वो रइसों की सोसाइटी से दरकिनार हो रहे हैं।

बदलने लगी है अब बेशर्मों की परिभाषा
बिकने वाले लोग अब किताब लिख रहे हैं ।।

1 टिप्पणी:

  1. बेहतरीन है भाई, लगे रहो,
    असित नाथ तिवारी

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