शनिवार, नवंबर 20, 2010

ये किसी की हक़ीकत है


मुलाकात
बातें
प्यार
विश्वास
समर्पण
धोखा
ब्लैकमेलिंग
दर्द
फरियाद
फजीहत
बेबसी
खुदकुशी ।।
                पहली बार उन दोनों की नज़रें शर्माते हुए मिली थी। फिर शुरू हुआ बातों का सिलसिला। ये बातें दोस्ती में बदल गई। दोनों चहचहा कर मिलने लगे। फिर शुरू हुआ प्यार का खेल। दोनों के दोस्ती के बीच विश्वास का जो पुल बना,वो भीतर से खोखला था। लेकिन लड़की उसे समझ नहीं पाई। उस पुल के सहारे वो जिंदगी की नहर को पार करने की ठान ली। लड़की ने अपना सबकुछ लड़के को समर्पित कर दिया। लेकिन लड़का तो फरेबी निकला। उन्होंने लड़की का एमएमएस बना डाला। और फिर ब्लैकमेल करने लगा। एक हंसती खेलती ज़िदगी की फजीहत हो गई। वो बेबस हो गई। उन्होंने कई जगहों पर फरियाद की। लेकिन कुछ नहीं हुआ। अब उसकी ज़िंदगी बोझ लगने लगी। वो बेबस होकर खुदकुशी कर ली। ज़िंदगी खत्म कर ली। ये सिर्फ उसकी व्यथा नहीं है। फरेबी इस संसार में कईयों की कथा है। बस,कुछ दब जाते हैं। कुछ सामने आ जाते हैं।

2 टिप्‍पणियां:

  1. बेहतर प्रयास...ऐसी व्यथाओं को कुरेदने की..

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