शनिवार, अगस्त 15, 2009

भूखा गाँव

आजाद हिन्दुस्तान का एक अभागा गांव है रातू बिगहा। जो बिहार के जहानाबाद जिले में घोषी प्रखंड है। आजादी के 62 साल के बाद भी इस गांव के लोगों को रोटी नसीब नहीं हो रही है। इस गांव में लोगों के घर में कई दिनों से चुल्हा नहीं जला है। जिंदगी के लिए गरीबी से जंग लड़ते इस गांव के लोग अब रोटी के अभाव में दम तोड़ने लगे हैं। एक तरफ देश आजादी का जश्न मनाने की तैयारी में लगा था और दूसरी तरफ इस गांव के लोग अपने परिजन के शव को श्मशान घाट तक पहुंचाने की तैयारी कर रहे थे। इस गांव में पिछले एक हफ्ते में भूख से तीन लोगों की मौत हो चुकी है। लेकिन किसी को इसकी परवाह नहीं है। दलितों और गरीबों के इस बस्ती के लोगों के लिए सरकार ने बीपीएल कार्ड तो बनबा दियाए पर लोगों को आज तक अनाज नहीं मिला। इन लोगों की रोटी से नेता अपना पेट भर रहे हैं।
सरकार गरीबी मिटाने के लिए कई तरह की योजनाएं बना रही हैए लेकिन जहानाबाद के इस गांव में गरीब मिट रहे हैं। शुरू में जब लोगों ने इसकी शिकायत संबन्धित अधिकारी से की तो कोई देखने के लिए नहीं आया। अब जब बात लोगों की मौत तक पहुंच चुकी है तो बीडीओ साहब भी इसकी टोह लेने के लिए गांव तक पहुंचे है। और अनाज नहीं देने वालों के साथ सख्ती से कार्रवाई का आश्वासन दे रहे हैं। खैर क्या कार्रवाई होगी ये सभी लोग भलीभांति जानते हैं। कहते हैं कि दर्द का हद से गुजर जाना है दवा होना। और अपने दर्द को दवा बना चुके इस गांव के लोग आज भी स्वतंत्रता का इंतजार कर रही है। ये 62 साल के आजाद हिन्दुस्तान की नंगी तस्वीर हैए जहां लोगों के लिए रोटी आज भी एक सवाल बना हुआ है। ये गांव हमें अपनी सच्ची आजादी का आइना दिखा रही है। गांव की बुढी आंखे देश के नेताओं से सवाल पूछ रही है कि क्या यही दिन देखने के लिए देश को आजाद किया गया था। क्या गांधीजी ने जो आजादी का सपना देखा था क्या उसकी यही हकीकत है ?


1 टिप्पणी:

  1. bahut hee achchhee jankaree dee hai aapne, dhanyawad. aazad bharat ke nikammee sarkaron se ab koi ummid bhi banki nahee rahee.

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