शनिवार, जनवरी 16, 2010

मॉडर्न समाज

आजकल इज्जतदारों के भाव गिर गये हैं
औने-पौने दाम पर इमान बिक रहे है।

लगने लगी है रिश्तों की बोलियां
इंसान सरेआम नीलाम हो रहे है।

लंबी-लंबी कार पर चढ़ने की हसरत में
शहर में तेजी से बेइमान बढ़ रहे हैं।

इस मॉडर्न बाजार में जो शिरकत नहीं करते
वो रइसों की सोसाइटी से दरकिनार हो रहे हैं।

बदलने लगी है अब बेशर्मों की परिभाषा
बिकने वाले लोग अब किताब लिख रहे हैं ।।

बुधवार, जनवरी 06, 2010

आंकड़ों का खेल

पिछले कुछ दिनों में बिहार में दो नये आंकड़े आये है। दो अलग-अलग क्षेत्र में। एक बिहार की गरीबी को दिखा रही है तो दूसरे में बिहार को सबसे तेजी से विकास करने वाला राज्य बताया है। लेकिन इस सब के बीच आम जनता कहां हैं। जहां है परेशान हैं।
सर्दी का सितम जारी है। हाड़ कंपकंपा देने वाली ठंड है। कनकनी ऐसी की कलेजा बाहर निकल जाय। ऐसे में भी हजारों लोग सड़क के किनारे रात काटने को मजबूर हैं। लोगों की समस्यायें सिर्फ इतनी ही नहीं है। और भी कई वाजिब कारण है। आंकड़ें भी है। हकीकत भी। महंगाई चरम पर है। सुखाड़ के कारण खेत खाली है। अपने साथ-साथ पशुओं की भी चिंता है। हजारों लोगों की नौकरी छुटी हुई है। जो लोग राज्य से बाहर रहकर रोटी का जुगाड़ कर रहे हैं वो भी खुश नहीं हैं। पंजाब में पुलिस पीट रही है तो दिल्ली की मुख्यमंत्री उलहाना दे रही हैं। ये स्थिती कमोबेश सभी दूसरे राज्यों का भी है। इसके साथ आंकड़े भी बताते हैं कि सब कुछ ठीक ठाक नहीं है।
यदि सुरेश तेंदुलकर समिति की रिपोर्ट को देखें तो उसमें भी स्थिती अच्छी नहीं है। तेंदुलकर की रिपोर्ट के अनुसार राज्य में 75।14 फीसदी लोग गरीबी रेखा से नीचे गुजर-बसर कर रही है। आम लोग त्रस्त है।
लेकिन राज्य विकास कर रही है। सरकार खुश है। सरकार इसे साबित करने के लिए नये आंकड़े का सहारा ले रही है। जिसमें कहा गया है कि बिहार का विकास दर 11.03 फीसदी है। यानी देश के विकास दर (8.49) से करीब तीन फीसदी ज्यादा। जबकि देश का सबसे ज्यादा विकसित राज्य गुजरात से महज 0.2 प्रतिशत कम।खैर, जमीनी तौर पर इतनी हकीकत कहीं नहीं दिखती है जिससे इस बात की पुष्टि हो सके कि विकास दर में बिहार दूसरे स्थान पर है। ऐसे में लगता है कि या तो विकास राज्य के महज 25 प्रतिशत लोगों में हुआ है या कागजी है। लेकिन सरकार ढ़िढ़ोरा पिट रही है। कुछ महीनें बाद चुनाव होने वाला है। और वो चुनाव में इस बात को भुनाना चाहते है। और इसी की कोशिश में लगे हैं। क्योंकि नेता जानते हैं कि भूखा सोने को भी तैयार है ये देश मेरा आप परियों का उसे ख्वाब दिखाते रहिये।

गुरुवार, दिसंबर 31, 2009

चल पड़ा हूं

मैं अपने भूतों पर
बिलखता नहीं
भविष्य की सोचता नहीं
वर्तमान में लड़ता हूं
संघर्ष के एक – एक क्षण को
संजोकर रखता हूं
मैं तोड़ दिये जाने से नहीं डरता
कर्मों पर विश्वास करता हूं
मैं राखों से नहीं खेलता
रोज आगों में तपता हूं
कठिर डगर चुन ली हमने
पर सहारे की अपेक्षा नहीं रखता
अपनी मंजिल को पाने के लिए
हर पल अग्नि परीक्षा देता हूं
हर मो़ड़ पर छली खड़ा है
हर कृत्य पर टेढ़ी नजर रखता है
हर डगर रोड़ा अड़काता है
ठोकर खाने से थोड़ा लड़खड़ाता हूं
पर प्रबल संकल्प के सामने
किसी का चलता नहीं
यही सोचकर एक बार फिर से
चल पड़ता हूं ।।

हैप्पी न्यू इयर

नववर्ष
आपका अभिनन्दन
पुलकित मन
हर्षित नयन
हाथ जोड़ अर्पित सुमन
नव कामना
नव प्रेरणा
नव चेतना
नव आराधना, नव स्वप्न
स्वथ्य तन
विश्वस्त प्रण
खाली ना जाय एक भी क्षण
सतत संपन्न रहे अभिजन
बुद्धि, बल, धन से संपन्न
हर क्षण जिते जीवण का रण
हंसी के संग हो शुरूआत हर दिन
हर दिन हो खुशी का संगम
यूं ही महका करे चंदन का वन।।

मंगलवार, दिसंबर 29, 2009

चंचल मन

सब के बीच बैठा हूं
लेकिन वहां नहीं हूं
जहां मैं बैठा हूं
निष्कर्षविहीन बहस निरंतर जारी है
सशरीर उपस्थित हूं
लेकिन मेरा मन
भटक रहा है कहीं और ।

शनिवार, दिसंबर 26, 2009

तेरे नाम पाती

इंतजार, इंतजार और इंतजार
बरस बीत गये इंतजार के
इंतहा हो गये प्यार के
तेरी यादों को सीने में समेट रखा हूं
बस एक यादों के सहारे
अभी तक बैठा हूं
याद आता है तेरा वो मिलना
गोद में सर छिपाकर घंटों बैठना
जिंदगीभर साथ चलने की कसमें खाना
मेरे कहने पर तुम
घर की दहलीज लांघ आती थी
अपना सबकुछ हमारे पास छोड़ जाती थी
मैं वही हूं,
जिसकी तुम शहजादी थी
जिसे अपना हमसफर बनाई थी
हर किसी से हमारे प्यार की
किस्से सुनाया करती थी
अपने आंचल पर मेरा नाम लिखा करती थी
कभी हारने पर तुम्हीं मुझे समझाती थी
भटकने पर राह तुम्हीं दिखाती थी
आज जब तुम्हीं ने मुझे हरा दी हो
किससे सुनाऊं मैं अपना अफसाना
अपलक नेत्रों से बाट जोहती मेरी उम्मीदें
किसी भी आहट पर चौंक उठती है
शायद तुम हो।
और कितना लोगी मेरी परीक्षा
एक बार नजदिक आओ
तुम्हे गले लगाने कि है
मेरी अंतिम इच्छा ।।

शनिवार, सितंबर 05, 2009

मेरे गुरूजी...

आप में ममत्व है
आप में अपनत्व है
आप के ही तत्व से
मेरा अस्तीत्व है
आपकी करुणा से
आपकी प्रेरणा से
आप की ही रचना से
मेरा व्यक्तित्व है।
आप मेरे इष्ट हैं
आप ही विशिष्ट हैं
आप मेरे द्रोण हैं
और आप ही वशिष्ठ हैं
मां मे भी आप हैं
पिता में भी आप हैं
भाई में भी आप हैं
बहन में भी आप हैं
जिंदगी के हर मोड़ पर
आप मेरे साथ हैं
मेरी हर सांसो पर
आपका अधिकार है
आपकी पूजा से ही
मेरा उद्धार है ।।
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गुरु गोविन्द दोउ खड़े
काके लांगू पांय,
बलिहारी गुरु आपकी
गोविन्द दियो बताय॥