रविवार, जून 03, 2012

नज़रों का यूं मिलना..

वो मेरी ओर देखती है
मैं उसकी ओर देखता हूं
फिर जो होता है
वो सुखद अहसास देता है
न हाथ हिलते हैं
न होंठ खुलते हैं
सिर्फ नज़रों से
 नज़र की बात होती है
ये सिलसिला
पल दो पल ही चलती है
मगर बहुत ख़ास होती है
नज़रों का यूं मिलना
इत्तेफाक होता है
पर यही इत्तेफाक तो
इतिहास बनता है ।।

शनिवार, जून 02, 2012

हत्यारों का मुखिया या वीर ब्रह्मेश्वर


वही हुआ जिसकी आशंका थी । ब्रह्मेश्वर नाथ सिंह ऊर्फ ब्रह्मेश्वर मुखिया की हत्या कर दी गई । जो जैसा करता है, वो वैसा ही पाता है । ब्रह्मेश्वर सिंह की जो शख्सियत थी, या कहें कि उनकी जो छवि थी, उसका  ऐसा ही अंत होता है । सत्तर साल के बूढे शरीर में चालीस गोलियां  दाग दी गई । 273 हत्याओं का  मुखिया पलभर में ढेर हो गया । 
          आप ब्रह्मेश्वर सिंह को हत्यारों और नरसंहारों का मुखिया कह सकते हैं । आप उन्हें बेदर्द और बेदिल इंसान कह सकते  हैं । लेकिन सवाल उठता है कि आखिर बरमेसर नाम का दीनहीन, दुबला पुतला शरीर वाला इंसान हत्यारों का सरदार कैसे बन गया  ?  आखिर कैसे तथाकथित ऊपरी तबके के लोग उसके पीछे दौड़ पड़े  ?  वो कैसे बुद्धिजीवियों के बड़े तबके का हीरो बन गया ?  बरमेसर मुखिया कोई पेशेवर अपराधी नहीं था । वो पैसों के लिए या फिर स्वयं स्वार्थ पूर्ति के लिए ऐसी सेना नहीं बनाई, जो लोगों की बेरहमी से हत्या करती थी । 
         दरअसल हालात ने बरमेसर को ब्रह्मेश्वर मुखिया बना दिया । शातिर और खौफनाक दिमाग की करतूत एक तरह से प्रतिकार था । जिस समय ब्रह्मेश्वर मुखिया की अगुवाई में रणवीर सेना एक के बाद एक नरसंहारों को अंजाम दे रही थी, उस वक्त बिहार में समाजिक और राजनीतिक समीकरण कुछ यूं थे, जिसका परिणाम मौते होती थी । दरअसल तथाकथित निचले तबकों का एक समूह  सरेआम सत्ता को चुनौती दे रहा था । जमींदारों की जमीन पर जबरन कब्जा कर रहा था । खेतों से फसल लूट लिये जाते थे । जमींदारों की बहू बेटियों की इज्जत खेला जाता था । सरकार मौन थी । प्रशासन बेपरहवाह था । पुलिस कोई कार्रवाई नहीं कर पा रही थी । छोटे छोटे कई संगठन पैदा हो गये थे ।  एमसीसी जैसे संगठनों के हौसले बुलंद होते जा रहे थे । फेल होती व्यवस्था के बीच इन्हीं संगठनों से निपटने और अपनी बहू बेटियों की इज्जत बचाने का बीड़ा उठाया ब्रह्मेश्वर सिंह ने । उन्होंने रणवीर सेना के नाम से एक संगठन बनाया ।  जिसमें कई छोटे छोटे संगठन शामिल हुए । जमीनदार तबके के लोग उसमें शामिल होने लोगे । पैसा और हथियार जमा होने लगा । और फिर एमसीसी के नरसंहार के बाद रणवीर सेना की ओर से नरसंहार होने लगा । 
        जिस तरह से ब्रह्मेश्वर मुखिया की अगुवाई वाली रणवीर सेना कत्लेआम मचाती थी । महिलाओं और बच्चों को भी नहीं छोड़ती थी । एक-एक नरसंहारों को अंजाम दिया । उससे  इतिहास में ब्रह्मेश्वर मुखिया का नाम एक कातिल के रूप में दर्ज होगा, लेकिन जातिगत समीकरण में उलझे बिहार का एक बड़ा तबका ऐसा है, जो उन्हें 'वीर ब्रह्मेश्वर' के नाम से याद रखेगा । 

मंगलवार, मई 01, 2012

बहन की व्यथा


  
    नमस्कार
            मैं उत्तर प्रदेश की एक बेटी हूं....आप मुझे किसी भी नाम से जान सकते हैं...मुन्नी, मीना, रजिया या कुछ और.. आज मैं व्यथा सुनाऊंगी इंसानियत की,,,मासूमियत की...कलेजा थाम के सुनियेगा...क्योंकि इसमें किसी का दर्द छुपा है...किसी की ज़ार जार रोती ज़िंदगी तो किसी की मौत की दास्तां है ये....ये व्यथा है मेरी उन बहनों की जिसे दरिंदों ने बलात्कार के बाद जलाकर मारने की कोशिश की...या फिर मार ही डाला...मेरी उन बहनों की जिसकी हंसती खेलती ज़िंदगी पल भर में नर्क बन गई...जिसका सपना देखते ही देखते चकनाचूर हो गया...जो या तो दुनिया छोड़ गई या फिर जिंदा लाश बनकर रह गई...ये मेरी उन बहनों की व्यथा है जिसे इंसान के शक्ल में भेड़ियों ने नोचा है...जिसके बेजान जिस्म के साथ हैवानों ने खेला है...आज मैं बताऊंगी अपनी बहनों की ऐसी सच्चाई जो उसे शूल की तरह चूभो रही है...जिसका दर्द उसे ताउम्र सालता रहेगा...मेरी इन बहनों की तदाद कोई एक, दो या तीन नहीं है...कई हैं...जो हर गली मुहल्ले में वहशी दरींदों के शिकार हुई हैं...आज मैं उन तमाम ज़ख्मों को कुदेरूंगी,  जिसे अपना बनकर गैरों ने मुझे दिया है...मैं वो घाव दिखाऊंगी जिसका दर्द सिसकियां बनकर मेरी बहनों की होठों से पल पल निकलती है...
         बेरहमी और बेदर्दी के फेहरिस्त काफी लंबी है...सबसे पहले बरेली की उस बहन की व्यथा...जिसके साथ तीन दरिंदों ने हैवानियत का खेल खेला,,,18 साल की मेरी वो बहन घर में अकेली थी...अपने सपनों की दुनिया  में खोई हुई थी,,,तभी तीन लड़कों ने घर में दस्तक दी...तीनों ने मिलकर उसके साथ बलात्कार किया...बेरहमी की  हद देखिए कि बलात्कार के बाद  हैवानों ने किरोसीन तेल छिड़ककर उसे आग के हवाले कर दिया...वो चिखती रही...चिल्लाती रही...लेकिन किसी ने उसे बचाना मुनासिब नहीं समझा...जब तक उसके घरवाले घर पहुंचते तब तक सबकुछ खत्म हो चुका था....मेरी बहन 80 फीसदी तक जल चुकी थी...अस्पताल पहुंचते पहुंचते उसने दम तोड़ दिया....ये तो एक तरह से ठीक ही हुआ क्योंकि मेरी उस बहन के लिए ये जिंदगी अब अभिषाप ही बन जाती......
            बाराबांकी में तो एक रिश्तेदार ने रिश्ते को आग के हवाले कर दिया...जिसपर मेरी बहन आंख मूंदकर भरोसा करती थी,,,जिसके बारे में वो गलत सोच भी नहीं सकती थी...उसी ने उसके साथ घिनौनी हरकत की...पहले घर बंदकर बलात्कार किया...और फिर मिट्टी का तेल डालकर आग लगा दी...इतना ही नहीं आग लगाकर वो घर को बंद कर फरार हो गया..लेकिन मेरी उस बहन ने हिम्मत नहीं हारी....आग बुझाया और फिर शोर मचाया...शोर सुनकर आसपास के लोग मौके पर पहुंचे...और फिर उसे अस्तपाल में भर्ती कराया गया.....
             देवरिया में ही रिश्ता तार तार हुआ...मेरी एक बहन के साथ एक सिरफिरे ने पहले   दुष्कर्म करने की कोशिश की...मेरी जाबांज बहन ने जब उसका विरोध किया तो वो दरिंदा आगबबूला हो गया....लड़के ने पेट्रोल छिड़कर आग लागा दी...ये घटना शाम के  वक्त हुई जब घर के सब लोग छत पर सो रहे थे,,,लड़की घऱ में अकेली थी..तभी पड़ोस का वो लड़का,,,जिसे वो भाई कहकर पुकारती थी..वो चुपके से घर में घुसा और जबर्दस्ती करने लगा.....
                   गाजीपुर में मेरी बहन को उन लोगों ने आग का गोला ही बना डाला.....महज सोलह साल की थी मेरी वो बहन..रात के वक्त शौच करने के लिए घर से निकली थी...कुछ ही दूर गई थी कि अंधेरों का फयादा उठकार कुछ लड़कों ने उसे अपना शिकार बना लिया...पहले उसके साथ बलात्कार किया....और फिर पोल खुल जाने के डर से उसे जला दिया...आग की लपटों से घिरी लड़की जोर जोर से चीखने लगी...बच्ची की दर्दनाक आवाज सुनकर गांव के लोग जब तक उसके पास पहुंचते, तब तक दरिंदे फरार हो चुके थे...लोगों ने आग बुझाई और फिर लड़की को अस्पताल ले गये...लेकिन वो मौत से ज्यादा देर तक नहीं लड़ पाई....ज़िंदगी से हार गई.....
             अब सुनाती हूं फतेहपुर की उस बहन की व्यथा....जिसे अपनी हिम्मत की कीमत चुकानी पड़ी....घटना शिवपुरी के एक गांव की है....जहां बीस बरस की मेरी बहन के साथ कुछ दरींदों ने मिलकर बलात्कार किया...ये बात उन्होंने अपने घरवालों से बताई....उन्होंने हिम्मत दिखाई...चुप रहना ठीक नहीं समझा,,,घरवालों को साथ लेकर सामूहिक बलात्कार का केस दर्ज कराने पुलिस के पास पहुंची,,,पुलिसवालों ने उसे इंसाफ का भरोसा दिलाया....आंखों में न्याय की आस लिए वो घर लौट रही थी...तभी हैवानों ने उसे घेरकर पहले पिटाई की...और फिर मिट्टी तेल डालकर आग लगा दी....
             महोबा के भरवारा गांव में बेखौफ हैवानों ने घर में घुसकर मेरी एक बहन के साथ बलात्कार किया....मेरी वो बहन  घर में अकेली थी....अपने घर का काम कर रही थी....तभी एक लड़का घर में घुसा....घर को बंद कर दिया और फिर खेला हैवानियत का वो खेल...जिसने उसकी ज़िंदगी बर्रबाद कर दी....महिला के चीखने की आवाज सुनकर आस पड़ोस के लोग दौड़ पड़े....जब तक वो हैवान वहां से भागता तब तक लोगों ने उसे पकड़ लिया...
               लखीमपुर खीरी के भीड़ा क्षेत्र में भी मेरी बहनें सुरक्षित नहीं है...उसकी इज्जत और आबरू से खेलने का दौर बदस्तूर जारी है,,,ये घटना अंबारा गांव की है....कुछ ही दिन बाद उस लड़की की शादी होने वाली थी....वो दुल्हान बनने वाली थी....डोली पर चढ़कर अपने साजन के घर जानेवाली थी...लेकिन पड़ोसी ने ही उसका सत्यानाश कर दिया...उस दिन मेरी वो बहन घर में अकेली थी....तभी पड़ोस का एक लड़का घर में घुसा और उसकी आबरू लूट ली...जब लड़की ने इसका विरोध किया उसने धारदार हथियार से हमला कर दिया...वो गंभीर रूप से घायल हो गई....खुशी के ख्वाबों का पंख लगाकर उड़ने वाली मेरी बहन ग़मों के समंदर में डूब गई.....
              इलाहाबाद में तो  दरींदों ने हैवानियत की सारी हदें लांघ दी...हैवानों ने मेरी उन मासूम बहनों को शिकार बनाया गया....जिसे बलात्कार का मतलब भी न पता था....जो इसका विरोध करना भी नहीं जानती थी...जिसे ये भी नहीं पता था कि इस गंदे खेल की शिकायत करनी होती है...उसकी उम्र तो गुड्डे गुड़ियों से खेलने की थी....लेकिन हवस के अंधे बेरहमों ने उसे भी नहीं बख्शा....इसका खुलासा तब हुआ, जब गोद ली जा चुकी एक लड़की ने अपने घरवालों से बालगृह की कहानी सुनाई....सच्चाई जब सामने आई तो सब के सब हैरान रह गये....जिसे बच्चियां अंकल कहा करती थी....जो  उसका देखभाल करता था.....वो चपरासी ही बलात्कारी निकला...बच्चियों से बलात्कार की इस घटना के बाद प्रशासन महकमा हिल गया....
     ये तो कुछ  की कथा है....और भी कई बहनें हैं जो इस बदमानी की बेइंतहा दर्द लेकर कहीं गुमनाम ज़िंदगी जी रही है या फिर दुनिया छोड़ गई.... मेरी इस व्यथा पर गौर जरूर कीजिएगा...एक बार जरूर सोचिएगा...मेरी तरह वो आपकी भी बहने हैं...खासकर अखिलेश भैया आप जरूर ध्यान दीजिएगा...क्योंकि आपसे काफी उम्मीदें हैं....अगर समय रहते इन दरीदों के जिंदगी में बेरियां नहीं पहनाई गई, तो आपके राज में मां, बेटियां पैदा करना छोड़ देंगी.....
                             नमस्कार   

सोमवार, अप्रैल 30, 2012

वो...

दुआ में, आरजू में 
हवा में , खुशबू में
लफ्जों में, अरजों में
सर्द में, बरसात में
धूप में, छांव में
प्यार के हर मौसम में
हसीन ख्वाबों में
सांसों में, अहसासों में
दिल में, धड़कन में
रगो में दौड़ते 
लहु के कण कण में 
घाव में, जख्म में 
दर्द में, मरहम में
खुशी में, गम में
फुर्सत के क्षण में 
सिर्फ उनकी याद आती है....

सोमवार, अप्रैल 23, 2012

सीडी ने सिंघवी को निकम्मा कर दिया...


सीडी । बड़ी बकवास चीज है । इसका अविष्कार जिसने किया । बहुत बुरा किया । ऊपर से सोशल नेटवर्किंग साइट । इसने तो और भी सत्यानाश कर दिया । कल तक नेताजी बड़े काम के थे । आज निकम्मा हो गये हैं । कोई काम नहीं बचा । न पार्टी के प्रवक्ता पद बचा । न ही ड्राफ्टिंग कमेटी का अध्यक्ष पद । कौन नहीं करता है ये सब काम । ज्यादातर नेता करते हैं । उन्होंने कर लिया तो क्या बुरा किया । इतने बड़े वकील हैं । वकालत करते- करते नेता बने । इतना बड़ा पद । रूतबा । पैसा । पावर । आखिर किस काम के । इतना भी नहीं कर सकते । 
   सबसे बुरा किया ड्राइवर ने । उसने क्यों किया स्टिंग ऑपरेशन । किया तो किया, उसे नेट पर क्यों डाला । कितना विश्वास था उसके ऊपर । पता नहीं कौन सी दुश्मनी निकाल ली । एक बार भी नहीं सोचा । बोलता तो उसके लिए भी कुछ कर देते । लेकिन । सब खत्म कर दिया । कहीं का नहीं छोड़ा । किस- किस को विश्वास दिलाएंगे नेता जी कि सीडी नकली है । सीडी के साथ छेड़छाड़ की गई है । जिधर जाते हैं सब वही पूछता है । नजर टेढ़ी कर देखता है । और फिर हंस देता है । 
        बेचारे । प्रेस कांफ्रेंस करने आते थे तो कितना स्मार्ट लगते थे । व्हाइट कुर्ता । चेहरे पर मुस्कान । चश्मा के नीचे से झांकती हुई आंखें । हंसते हुए जवाब देते थे । अब मीडिया से तौबा कर लिया है । नहीं आएंगे मीडिया के सामने । सही किया नेता जी ने । क्यों आएंगे । चैनल वाला सब  कुदेर कुदेर कर पूछेगा । क्या-क्या किया । कैसे किया । कैसा महसूस किया । अब आप क्या कहेंगे ।  वगैरह । वगैरह । सब से तौबा कर लिया । 

रविवार, अप्रैल 22, 2012

दीदी राज में रहना है तो.....



आप अपने मन पसंद न्यूज़ चैनल नहीं देख सकते । आप सरकारी नेताओं के खिलाफ नहीं बोल सकते । इन सब के लिए आप को सरकार का रूल रेग्यूलेशन फॉलो करना होगा । आपको सरकार के हिसाब से चलना होगा । नहीं तो पुलिस पकड़ कर ले जाएगी । आपके ऊपर मुकदमा भी हो सकता है । आप जेल भी जा सकते हैं । सो, संभल जाइये । कोई प्राइवेट न्यूज़ चैनल देखने से पहले अपने घर के चारों तरफ ताक झांक कर लीजिए । कहीं कोई सरकार का भेदिया देख तो नहीं रहा । नहीं तो मुश्किलें बढ़ जाएंगी । ऐसा नहीं है कि यहां प्रेस पर सेंसरशीप लगा है । दरअसल यहां दीदी का राज है । यहां वही होगा, जो दीदी चाहती हैं । या फिर दीदी को चाहनेवाले चाहते हैं । हालांकि आपके लिए  दीदी अपना चैनल खोलने वाली हैं । जिस पर दीदी दाहाड़ मारेंगी । सरकार का बखान होगा । अखबार भी निकेलगा । सुबह- सुबह हत्या, बलात्कार, लूट जैसी घटनाएं देखने या पढ़ने को नहीं मिलेंगी । दिनभर में कभी नहीं । रात में भी नहीं । जिस घोटाले या भ्रष्टाचार को लेकर आप दिन रात माथा पच्ची करते हैं, वैसा कुछ देखने सुनने को नहीं मिलेगा । बस सरकार के वादों को दोहराया जाएगा । दावों को डंके की चोट पर ठोका जाएगा । 
   कार्टून बनाने वाले या उसे पसंद करने वाले आप सबसे पहले सावधान हो जाइये । आपको तो बचाने के लिए भी कोई नहीं आयेगा ।  
          आप अपनी बेटी या बेटे की शादी वहां नहीं कर सकते, जाहां आप चाहते हैं । वहां करिये, जहां सरकार चहाती है । हां, एक शर्त पर हो शादी हो सकती है । कि लड़का या ल़ड़की सत्ता पार्टी की सदस्याता ग्रहण कर लें । नहीं तो मंडप से दुल्हे को लौटना पड़ सकता है । अविवाहित लड़के-लड़कियां पहले संभल जाएं ।  प्यार इश्क करने से पहले एक-दूसरे से पूछ लें कि वो किस पार्टी से ताल्लुक रखता है । नहीं तो शादी से पहले तलाक हो जाएगा । 
             दीदी राज में रहना है तो इन बातों को ध्यान में रखना होगा । हां गलती से  लोकतंत्र और राजतंत्र के सिद्धांत में मत उलझिएगा । वरना फालतू में ब्लड प्रेशर बढ़ जाएगा । बीमार पड़ जाएंगे । डॉक्टर और दवाइ  का खर्चा अलग से । सो सावधान रहें । सुरक्षित रहें । अपना ख्याल रखें । दीदी के फरमानों को नज़र अंदाज़ करने की ग़लती कतई ना करें । आपकी ज़िंदगी का सवाल है ।  

शुक्रवार, मार्च 23, 2012

सचिन...सचिन और सचिन

सचिन का सौ शतक । इंतजार पूरा हुआ । सचिन का । सचिन के फैंस का । हर पारी में 90 पार पहुंचते ही दिल की धड़कन तेज़ हो जाती थी । आखिरकार वो क्षण भी आ गया । जब सचिन के चेहरे पर संतोष का भाव था । दबाव से उबरा सचिना का जलवा अगले मैच में देखने को मिला । बंगलादेश के खिलाफ मैच देखते-देखते एक बारगी मन में एहसास हुआ कि सचिन थक चुके हैं । लेकिन पाकिस्तान के खिलाफ मैच में ग़लतफहमी दूर हो गई । मिड ऑन पर चौका । प्वाइंट पर चौका । विकेट के पीछे सिक्सर । बाइस गज पर दौड़ते वक्त कोहली को चुनौती देते सचिन । सचिन ऐसा नाम है, जो कभी थकता नहीं । हार नहीं मानता । सचिन सिर्फ क्रिकेटर नहीं रहे । वो आदर्श हैं । मार्गदर्शक हैं । प्रेरक हैं । हम सबके लिए । किस तरह चौतरफा दबाव से उबरा जाता है । किस तरह मौन रहकर भी आलोचकों को जवाब दिया जा सकता है ।